चैत्र कृष्ण प्रतिपदा है, आज पूरे देश में रंगों का महापर्व होली (धुलंडी) बड़े उत्साह से मनाया जा रहा है। चंद्रदेव आज पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में हैं। कुंभ राशि में सूर्य, मंगल, बुध और राहु का संयोग चल ही रहा है। क्योंकि इस नक्षत्र के देवता 'भग' प्रेम के प्रतीक हैं, इसलिए आज पुराने मतभेद मिटाकर रिश्तों में नया रंग भरने के लिए दिन खास है। आज 'धृति' योग रहेगा, जो मानसिक धैर्य के लिए शुभ है। अपने दिन के सही संचालन के लिए अमृत काल का लाभ उठाएं और भाईचारे से उत्सव मनाएं।
राहुकाल के दौरान विवाद से बचें और अपनी सहजता बनाए रखें।
महत्वपूर्ण विवरण तिथि
कृष्ण प्रतिपदा -सायं 04:48 बजे तक, फिर द्वितीया योग धृति - प्रातः 08:52 बजे तक,
फिर शूल करण कौलव -सायं 04:48 बजे तक करण तैतिल – प्रातः 04:51 बजे तक (5 मार्च), फिर गर सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
सूर्योदय का समय प्रातः 06:43 बजे
सूर्यास्त का समय सायं 06:23 बजे
चंद्रोदय का समय सायं 07:20 बजे चंद्रास्त का समय प्रातः 07:03 बजे सूर्य और चंद्रमा की राशियां सूर्य देव: कुंभ राशि में स्थित हैं चन्द्र देव: सिंह राशि में स्थित हैं – दोपहर 01:45 बजे तक
आज के शुभ मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त:-
आज अभिजीत मुहूर्त नहीं है अमृत काल रात्रि 12:54 बजे (5 मार्च) से रात्रि 02:32 बजे (5 मार्च) तक
आज के अशुभ समय:-
राहुकाल दोपहर 12:33 बजे से दोपहर 02:00 बजे तक गुलिकाल प्रातः 11:06 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक यमगण्ड प्रातः 08:11 बजे से प्रातः 09:38 बजे तक
आज का नक्षत्र आज चंद्रदेव पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र: प्रातः 07:39 बजे तक सामान्य विशेषताएं: रचनात्मक, ऊर्जावान, आकर्षक, मिलनसार, उदार, दानी, ईमानदार, मधुर वाणी, सुख-सुविधा प्रिय, कूटनीतिज्ञ, कभी-कभी अहंकारी, दिखावा पसंद और थोड़े आलसी। नक्षत्र स्वामी: शुक्रदेव राशि स्वामी: सूर्यदेव देवता: भग (प्रेम और विवाह के देवता) प्रतीक: बिस्तर या पलंग आज होली \ धुलंडी है
आज होली का पर्व (Holi 2026) बुधवार, 04 मार्च 2026 को पूरे देश में रंगों का महापर्व होली (धुलंडी) बड़े उत्साह के साथ मनाया जाएगा।
हिंदू धर्म में दिवाली के बाद इसे सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। पूर्णिमा तिथि 02 मार्च की शाम 05:55 बजे से शुरू होकर 03 मार्च की शाम 05:07 बजे तक रहेगी। ब्रज क्षेत्र की होली पूरी दुनिया में मशहूर है।
मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन और गोकुल की होली के साथ-साथ बरसाना की लट्ठमार होली का अपना एक अलग ही महत्व और आनंद है। ज्यादातर जगहों पर यह पर्व दो दिनों तक चलता है। पहले दिन को छोटी होली या होलिका दहन कहा जाता है, जिसे दक्षिण भारत में 'काम दहनम' के नाम से भी जानते हैं। दूसरे दिन मुख्य होली खेली जाती है, जो आपसी प्रेम और मेल-मिलाप का प्रतीक है। दिव्या गौतम