नीमच ।कृष्ण सुदामा के मित्रता का संसार में आदित्य है। सुदामा ने जीवन पर्यंत दरिद्रता और गरीबी को अपना लिया था लेकिन कृष्ण से कभी नहीं कहा कि वह उनकी सहायता करें, सुदामा स्वाभिमानी थे, उन्होंने जीवन पर्यंत कष्ट सहन कर कृष्ण के दुखों को अपना दुःख बना लिया था फिर कृष्ण ने भी समय आने पर अपना ऋण उतार दिया और सुदामा को दो लोक की खुशियों का राज दे दिया था। यह बात पंकज कृष्ण महाराज ने कही।
वे जय जिनेंद्र रिसोर्ट के पास गणपति नगर स्थित सिद्धिविनायक मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा के अंतिम दिवस बोल रहे थे। श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव के अंतिम दिन पूर्णाहुति हुई। व्यास पीठ पर विराजित गौ भक्त कथा मर्मज्ञ पंकज कृष्ण महाराज ने कहा कि कृष्ण सुदामा की मित्रता आधुनिक युग में आज भी आदर्श प्रेरणादायक कदम है।। कथा आयोजक समिति की ओर से कथा मर्मज्ञ, पंडित श्री व्यास मंच पर विराजित अत्याधुनिक वाद्य यंत्र के कलाकारों को श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। श्री कृष्ण लीला की कथा के अंतिम दिन चल रही श्रीमद् भागवत कुंभ में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित थे। कथा मर्मज्ञ पंडित पंकज कृष्ण महाराज ने भक्ति रस का प्रवाह करते हुए कहा कि सुदामा ब्रह्मज्ञानी थे, सुदामा जानते थे कि गुरु माता द्वारा दिए गए चने श्रापित हैं फिर भी उन्होंने अपने मित्र श्री कृष्ण के ऊपर दरिद्रता ना आए स्वयं ने श्रापित चने खा लिए और स्वयं ने दरिद्रता अपने ऊपर लेली। कथा प्रवचन के अंतिम दिन हवन पूजन एवं आरती के साथ प्रसाद के रूप में किया गया इसी के साथ साप्ताहिक श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा प्रवचन की पूर्णाहुति के साथ कथा का विश्राम हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित थे।