मनासा में GBS का कहर, कांग्रेस पहुँची कलेक्ट्रेट - न्यूरो डॉक्टर और मुफ्त IVIG इंजेक्शन की मांग।

Neemuch headlines January 15, 2026, 8:47 pm Technology

नीमच । मनासा क्षेत्र में तेजी से फैल रही घातक बीमारी जी.बी.एस. (गुलियन-बैरे सिंड्रोम) ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की गंभीर पोल खोल दी है। जिला कांग्रेस कमेटी नीमच ने इस मुद्दे को लेकर जिला प्रशासन को आड़े हाथों लिया है। इस जानलेवा बीमारी के कारण अब तक दो मासूम बच्चों की असमय मौत हो चुकी है, जबकि स्वास्थ्य विभाग के सर्वे में 7 अन्य संदिग्ध मरीज सामने आए हैं। इससे मनासा सहित आसपास के क्षेत्रों में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है।

इन्हीं गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए जिला कांग्रेस कमेटी ने गुरूवार को जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर हिमांशु चन्द्रा से मुलाकात की और जिले की दो अत्यंत महत्वपूर्ण जनसमस्याओं जी.बी.एस. बीमारी का प्रकोप और पेयजल की सुरक्षा को लेकर दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपे।

कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन से तत्काल, ठोस और प्रभावी कदम उठाने की मांग की। जिले में न जांच सुविधा, न विशेषज्ञ जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि मनासा क्षेत्र के रामनगर और सिपाही मोहल्ला जैसे इलाकों में जी.बी.एस. के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद जिले में न तो आधुनिक जांच की कोई सुविधा उपलब्ध है और न ही कोई न्यूरो विशेषज्ञ पदस्थ है परिणामस्वरूप, गंभीर स्थिति में पहुंचे मरीजों को मजबूरी में उदयपुर या अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में भेजा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि जी.बी.एस. का इलाज समय पर और विशेषज्ञ देखरेख में न हो तो मरीज की जान तक खतरे में पड़ सकती है। इलाज महंगा, गरीब मजबूर कांग्रेस ने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई कि जी.बी.एस. के उपचार में उपयोग होने वाला IVIG इंजेक्शन और अन्य दवाइयां अत्यंत महंगी हैं, जिनका खर्च लाखों रुपये तक पहुंच जाता है। आम और गरीब परिवारों के लिए यह इलाज कराना लगभग असंभव हो जाता है। इसलिए कांग्रेस ने मांग की कि जिला अस्पताल में तुरंत न्यूरो विशेषज्ञ की नियुक्ति की जाए और IVIG इंजेक्शन सहित आवश्यक दवाइयों को सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क उपलब्ध कराया जाए, ताकि किसी भी मरीज को केवल पैसों के अभाव में अपनी जान न गंवानी पड़े। जिला कांग्रेस ने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी बढ़ाकर तत्काल डोर-टू-डोर सर्वे कराया जाए, जिससे नए मामलों की पहचान प्रारंभिक अवस्था में ही हो सके और समय रहते इलाज शुरू किया जा सके।

पेयजल सुरक्षा पर भी जताई चिंता इसी अवसर पर इंदौर की दूषित पेयजल घटना को ध्यान में रखते हुए जिला कांग्रेस ने दूसरा ज्ञापन सौंपते हुए नीमच जिले के समस्त जल स्रोतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। कांग्रेस ने कहा कि यदि समय रहते जल स्रोतों की जांच और सफाई नहीं की गई, तो जलजनित बीमारियां भी गंभीर रूप ले सकती हैं। ज्ञापन में मांग की गई कि जिले के सभी प्रमुख बांधों, कुओं, सार्वजनिक नलकूपों के पानी की तत्काल बैक्टीरियोलॉजिकल व केमिकल जांच कराई जाए।

साथ ही, नगर पालिका और ग्राम पंचायतों के अंतर्गत आने वाले जल संग्रहण टैंकों की नियमित सफाई, पाइपलाइनों के लीकेज की मरम्मत और पानी में क्लोरीन की उचित मात्रा सुनिश्चित करने के लिए कड़े निर्देश दिए जाएं। आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग कांग्रेस नेताओं ने कलेक्टर से यह भी मांग की कि पेयजल स्रोतों की साफ-सफाई और जांच से संबंधित आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं, ताकि जनता को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके और प्रशासन पर विश्वास बना रहे। ज्ञापन देंने जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती के साथ पूर्व जिला अध्यक्ष अनिल चौरसिया, शहर ब्लॉक अध्यक्ष 1 मोनू लॉक्स, शहर ब्लॉक अध्यक्ष 2 ओम दीवान, मनासा ब्लॉक अध्यक्ष श्याम सोनी, महिला कांग्रेस जिला अध्यक्ष आशा सांभर, बृजेश सक्सेना, नाथूसिंह राठौड़, हिदायतुल्ला खान, गजेंद्र यादव, रामप्रसाद कसेरा, सुरेश धनगर, योगेश प्रजापति, मनोहर अंब, राजू गरासिया, घीसालाल जाट, नितिन हसीजा, राजेश जैन, बेबी मेहरा, शामीदा मिर्जा, राकेश सोनकर, साबिर मसूदी, शरीफ हुसैन, संजय पवार, शराफत हुसैन कारपेंटर सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजन शामिल थे।

महंगा इंजेक्शन, कांग्रेस की मुफ्त उपलब्ध कराने की माँग जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती ने कहा कि जी.बी.एस. बीमारी के उपचार में जो सबसे कारगर IVIG इंजेक्शन लगाया जाता है, उसकी कीमत करीब 15 हजार रुपये प्रति इंजेक्शन है। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि यह इंजेक्शन जिला चिकित्सालय या किसी भी सरकारी अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मरीजों को मजबूरी में निजी चिकित्सकों की सलाह पर बाहर से इंजेक्शन मंगवाने पड़ रहे हैं, जिससे इलाज का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि मरीज को कितने इंजेक्शन लगेंगे, इसका भी कोई निश्चित आंकलन नहीं होता, जिससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट रहे हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि इस महंगे लेकिन जीवन रक्षक इंजेक्शन को तत्काल सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क उपलब्ध कराया जाए। प्रशासन गंभीर नहीं हुआ तो मनासा बन सकता है दूसरा इंदौर श्री बाहेती ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि प्रशासन ने इस मामले में तत्काल गंभीरता नहीं दिखाई, तो मनासा क्षेत्र में भी इंदौर जैसी स्थिति बनने से इनकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि जी.बी.एस. बीमारी और पेयजल सुरक्षा दोनों ही आपस में जुड़े हुए गंभीर मुद्दे हैं। यदि स्वास्थ्य विभाग की निगरानी, समय पर जांच, इलाज और स्वच्छ पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई, तो हालात और भयावह हो सकते हैं। कांग्रेस ने प्रशासन से अपील की है कि वह अभी से सतर्कता और ठोस कार्रवाई करे, ताकि भविष्य में किसी बड़े स्वास्थ्य संकट से जिले को बचाया जा सके।

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