नीमच । भागवत कथा श्रवण करने से मनुष्य तो क्या प्रेत आत्मा का भी मोक्ष हो जाता है। श्री मद्भागवत श्रवण करने से मोक्ष हो जाता है। मरते हुए व्यक्ति को भागवत का आशीर्वाद मिल जाए तो मुक्ति हो जाती है। जो सच्चे मन से भगवान से मांगता है तो उसको सब मिलता है। भागवत श्रवण करने से पुण्य कर्म बढ़ते है और पाप कर्म नष्ट हो जाते हैं। सत्संग के बिना विवेक नहीं होता है। यह बात पंडित सोमनाथ शर्मा ने कहीं। वे श्री पंचमुखी बालाजी मंदिर एवं समस्त भक्तगण के तत्वाधान में श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर कानाखेड़ा के 11वें स्थापना दिवस एवं मकर संक्रांति के पावन उपलक्ष्य में पंचमुखी बालाजी मंदिर परिसर में 8 से 14 जनवरी तक प्रतिदिन सुबह 11 से शाम 4 तक आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या करने वाली नारी ताडने की अधिकारी होती है।
भागवत कथा श्रवण करने वाला एक व्यक्ति भी अपने जीवन में संकल्प लेकर अपने आचरण में परिवर्तन कर ले तो उसका श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करना सार्थक सिद्ध हो सकता है। परमात्मा को हर पल धन्यवाद देना चाहिए। परमात्मा नाटक और दिखावे से दूर रहते हैं। भगवान भजन कीर्तन सत्संग में रहते हैं, 7 दिन तक भागवत कथा श्रोताओं को नियमों का पालन करते हुए कथा श्रवण करना चाहिए। कथा को मनोरंजन का साधन नहीं बनाएं। मन मंथन का साधन बनाएं। प्रार्थना में भगवान हमारी बात सुनते हैं ध्यान में हम भगवान की बात सुनते हैं। भगवान से सिर्फ कृपा होती रहे यही मांगना चाहिए। पंचमुखी बालाजी मंदिर में 5 गायों की गौशाला स्थापित करनी चाहिए। यदि गौशाला प्रारंभहोती है तो अगली कथा निःशुल्क करने की घोषणा की गई। श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा में गोस्वामी तुलसीदास जी, हनुमान जी, सूर्य आराधना सूर्य प्रणाम विधि, धुंधली, धुंधकारी गोकर्णआदि विषयों के वर्तमान परिपेक्ष्य में महत्व प्रतिपादित किया। श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा का शुभारंभ 10 जनवरी को सुबह 11 बजे ग्राम काना खेड़ा स्थित प्राचीन रामोला मंदिर में पूजा अर्चना आरती के बाद हुआ।
आरती पोथी पूजन में पुलिस कर्मी पंकज नागदा, रेणु नागदा दिल्ली, प्रकाश पुरोहित, शिक्षक डम्बर लाल नागदा, लक्ष्मी नारायण नागदा, जनपद सदस्य महेश नागदा एवं बिजलवास, गिरदौड़ा कानाखेड़ा रेवली देवली बोरखेडी, रावत खेड़ा एवं दुल्हा खेड़ा, आदि क्षेत्र सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण श्रद्धालु भक्त उपस्थित थे। श्री मद्भागवत में महिलाएं लाल पीले परिधानों में सहभागी बनी थी। कई श्रद्धालु भक्त धुप में बैठकर भागवत श्रवण रहे थे। इस अवसर पर विभिन्न भजन कीर्तन की स्वर लहरियां बिखर रही थी। श्रीमद् भागवत पोथी पर पुष्प माला श्रीफल अर्पित कर श्रद्धालु भक्तों ने आशीर्वाद ग्रहण किया । श्रीमद् भागवत में सहभागी श्रद्धालु तेज शीत लहर के बावजूद भी निरंतर कथा श्रवण का पुण्य लाभलिया।