हर इंसान आज अपनी अनुकूलता के लिए पाप से जुड़ता जा रहे हैं - आचार्य जगच्चचंद्र सूरिजी जी म.सा.

Neemuch headlines January 6, 2026, 5:27 pm Technology

चीताखेड़ा । गुरुजी हमारे आए हैं नई रोशनी लाए हैं..... गुरु जी हमारो अंतरनाथ हमने आपको आशीर्वाद...... देखो देखो कौन आया जिनशासन का शेर आया....... जब तक सुरज चांद रहेगा जिनशासन का नाम रहेगा....... त्रिशला नंदन वीर की जय बोलो महावीर की..... आदि जयकारों के साथ ढोल-ढमाकों की गूंज के साथ नाचते झुमते थिरकते हुए गांव के विभिन्न मार्गों से मंगलवार को प्रातः काल जीरन से राजस्थान छोटीसादड़ी के रंभावली के लिए विहार के दरमियान दो दिवसीय स्थिरता के लिए विश्राम हेतु 2 परम् पूज्य आचार्य, 3 परम् पूज्य गुरुदेव संन्यास, 16 परम् पूज्य गुरुदेव मुनिराज, 3 परम् पूज्या साध्वी श्री जी म.सा. 24 साधु साध्वी भगवंतों का एक साथ चीताखेड़ा में पहली बार ऐतिहासिक भव्य मंगल प्रवेश हुआ।

डहेलावाला समुदाय के स्वाध्याय आचार्य श्री जगच्चचंद्र सूरिजी म.सा., आचार्य श्री कल्पयश सूरिजी जी म.सा., पंन्यास प्रवर श्री शीलचंद्र विजयी जी म.सा., पंन्यास प्रवर श्री चंद्रयश विजय जी म.सा., पंन्यास प्रवर श्री प्रसन्नचंद्र विजय जी म.सा., मुनिराज श्री राजयश विजय जी म.सा., मुनिराज श्री नयज्ञ विजय जी म.सा., मुनिराज श्री आत्मदर्शन विजय जी म.सा., मुनिराज श्री दिव्यचंद्र विजय जी म.सा., मुनिराज श्री गोयमचंद्र विजय जी म.सा., मुनिराज श्री केवलज्ञान विजय जी म.सा., मुनिराज श्री हितांशचंद्र विजय जी म.सा., मुनिराज श्री निर्ग्रथचंद्र विजयी मुनिराज श्री विजयघोष विजय जी म.सा., मुनिराज श्री जयघोष विजय जी म.सा., मुनिराज श्री भव्ययश विजय जी म.सा., मुनिराज श्री कृतनिश्चय विजय जी म.सा., मुनिराज श्री चिदयश विजय जी म.सा., मुनिराज श्री नन्दीसुत्र विजय जी म.सा., मुनिराज श्री विदवद विजय म. सा., मुनिराज श्री लब्धिचंद्र विजयी जी म.सा., परम् पूज्य साध्वी श्री शासन ज्योति श्रीजी म.सा., साध्वी श्री दीक्षित प्रभा श्री जी म.सा., साध्वी श्री मैत्री रत्ना श्री जी म.सा.का यहां के छोटे बड़े युवा बुजुर्ग महिला और पुरुष हर उम्र के सभी जैन अनुयायियों ने अपने - अपने व्यवसाय पूर्ण रूप से बंद रख साधु साध्वी भगवंतों की अगवानी के लिए अल सुबह से ही एक झलक पाने के लिए घंटों पहले पलक-पावडे बिछाए हुए जिस मार्ग से साधु साध्वी भगवंतों का आगमन होने वाला है उसी राह में टकटकी लगाए बैठे थे।

जैसे ही कोहरे की धुंध में हल्की सी भगवंतों की झलक दिखी तो जयकारों से क्षेत्र गुंजायमान कर दिया। जगह-जगह घर-घर द्वार द्वार जैन श्राविकाओं द्वारा रंगोली बनाई गई फिर अक्षत की गऊली बनाकर साधु-साध्वी भगवंतों का आत्मिय अभिनंदन कर आशीर्वाद लिया। जैन अनुयायियों का इतने बड़े संत श्री और साध्वी म.सा. का एक साथ इस गांव में भव्य मंगल प्रवेश को देखकर अभिभूत हो रहे थे। साधु-साध्वी भगवंतों का भव्य मंगल प्रवेश श्री मुनि सुब्रत स्वामी जिनालय पहुंचते पहुंचते धर्मसभा में परिवर्तित हो गया। धर्म सभा में सबसे पहले आराधना भवन में आचार्य भगवंत श्री विजय सुरेन्द्र सूरिजी म.सा. के पट्ट का लोकार्पण के लाभार्थी परिवार राजेश कुमार कंकरेचा, चिराग कंकरेचा, पूर्व सरपंच श्रीमती सुषमा जैन, प्राची जैन, श्रीमती शेली जैन द्वारा किया गया। इसी तरह गुरु पूजा का लाभ लेने वाले लाभार्थी सुभाष चंद्र बोहरा, सुमित बोहरा ने लिया और दिनांक 8 जनवरी गुरुवार को प्रातः चीताखेड़ा से राजस्थान छोटीसादड़ी के गांव रंभावली तीर्थंकर पार्श्वनाथ भगवान जिनालय तक निकलने वाला चतुर्विध संघ को हरी झंडी दिखाकर रवाना करने का लाभ लेने वाले विजय कुमार झातरिया ने लिया। सर्वप्रथम सभी कार्यक्रम का प्रारंभ में परम् पूज्य गुरुदेव आचार्य भगवंत आचार्य श्री जगच्चंद्र सूरिजी म.सा.ने आराधना भवन में उपस्थित श्रावक श्राविकाओं को व्याख्यान माला में धर्म वाणी प्रवाहित करते हुए कहा कि आत्मा में ही शक्ति है, जगाने की जरूरत है।

शास्त्रों में कहा गया कि 12 व्रत जिन्होंने ले रखा है वो श्रावक है। 12 व्रत नहीं तो कम से कम एक व्रत तो रखना ही है। जिसने 12 व्रत ले रखे हैं वही परिपूर्ण श्रावक है उसी व्यक्ति को पुण्य की बुद्धि और पाप का क्षय प्राप्त हो सकता है। श्री आचार्य भगवंत श्री ने कहा कि हमारे पाप जन्मांतर की भावना है तो पुण्य की धारा है तो ऐसे पुण्य करने की जरूरत नहीं है, धर्म आराधना में बितता है। लोग अपनी अनुकूलता के लिए पाप से जुड़ते जा रहे हैं।

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