डीकैन। विकसित भारत के संकल्प और आधुनिक रेल कनेक्टिविटी के दौर में भी नीमच जिले की एक बड़ी आबादी पिछले 47 वर्षों से रेल की पटरी बिछने का इंतज़ार कर रही है नीमच, जावद, डीकेन सिंगोली, कोटा रेल लाइन, जिसका सपना 1970 के दशक में देखा गया था, आज भी सरकारी फाइलों और आश्वासनों की धूल फांक रही है।
ताज़ा रेल बजट से भी क्षेत्रवासियों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन एक बार फिर उनके हाथ केवल हताशा लगी है। विकास की धुरी बन सकती है यह लाइन लगभग 140 किलोमीटर लंबी यह प्रस्तावित रेल लाइन न केवल मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच की दूरी कम करेगी, बल्कि औद्योगिक और व्यापारिक दृष्टि से भी गेम चेंजर साबित होगी। प्रस्तावित मार्ग का विवरण कुल दूरी लगभग 140 किमी. राज्यवार विस्तार, मध्य प्रदेश (65 किमी) एवं राजस्थान (75 किमी)। प्रमुख स्टेशन, नीमच, जावद, डीकेन, रतनगढ़, सिंगोली, भैंसरोड़गढ़, जवाहर सागर और कोटा। लाभान्वित क्षेत्र, 4 जिले, 6 तहसीलें और 325 से अधिक गांव। दूरी कम, फायदे अनेक विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि इस लाइन के निर्माण से नीमच और कोटा के बीच की रेल दूरी लगभग 120 किमी कम हो जाएगी।
इससे न केवल यात्रियों का समय बचेगा, बल्कि मालभाड़ा सस्ता होने से व्यापार को भी गति मिलेगी। वर्तमान में दिल्ली-मुंबई मार्ग पर रतलाम की ओर रेल यातायात का जो भारी दबाव है, उसे भी इस वैकल्पिक मार्ग से कम किया जा सकेगा। सियासी दांव-पेंच में उलझा सपना इस रेल लाइन का इतिहास उपेक्षा की कहानी बयां करता है। 1970 में राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा इसकी नींव रखे जाने के बाद 1993 में भी इस मुद्दे ने तूल पकड़ा था। साल 2014 के रेल बजट में तत्कालीन रेल मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने सर्वे के लिए बजट का प्रावधान भी किया था, लेकिन इसके बाद मामला फिर ठंडे बस्ते में चला गया। क्षेत्रीय नागरिकों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों द्वारा संसद में मजबूती से पक्ष न रखने के कारण आज भी यह योजना धरातल पर नहीं उतर पाई है। रोजगार और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि यदि यह लाइन शुरू होती है, तो क्षेत्र के पुरातत्व और पर्यटन केंद्रों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और नीमच रेल मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। क्षेत्रवासियों की मांग हम प्रशासन और केंद्र सरकार से करबद्ध निवेदन करते हैं कि दशकों से लंबित इस मांग पर तत्काल हस्तक्षेप करें।
वित्तीय और निर्माण स्वीकृति प्रदान कर 'विकसित भारत' के संकल्प को इस अंचल में भी साकार किया जाए।"