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वीआईपी कल्चर को दरकिनार कर IHRSO ने पेश की मिसाल: भाई को किडनी देने वाली चंद्रकला, पति की ढाल बनी लक्ष्मी सहित समाज की 'असली नायिकाओं' का भव्य सम्मान

Neemuch headlines March 9, 2026, 12:08 pm Technology

मनासा के समता विद्यालय में 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अनूठी पहल; संघर्षशील महिलाओं और कचरा बीनने वाले बच्चों को मुफ्त पढ़ाने वाली मातृशक्तियों का भी हुआ सम्मान

मनासा। आज 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जहां एक ओर बड़े-बड़े मंचों पर केवल हाई-प्रोफाइल और रसूखदार चेहरों को सम्मानित करने की होड़ मची रहती है, वहीं मनासा के समता विद्यालय में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन (IHRSO) ने इससे ठीक उलट एक नई इबारत लिख दी।

संगठन ने वीआईपी कल्चर और दिखावे को दरकिनार करते हुए उन निम्न और मध्यम वर्गीय महिलाओं को खोजकर मंच पर बिठाया, जिनका पूरा जीवन ही एक कड़ा संघर्ष रहा है या जो निस्वार्थ भाव से समाज निर्माण में जुटी हैं। आयोजन में बतौर मुख्य अतिथि नगर परिषद मनासा अध्यक्ष के प्रतिनिधि अजय तिवारी और हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश मूंदड़ा की पत्नी ज्योति जी मूंदड़ा (जो स्वयं एक सक्रिय समाजसेविका हैं) ने शिरकत की। संगठन ने किसी बड़े घराने या नेतागिरी से जुड़ी महिलाओं के बजाय उन विधवाओं, एकल महिलाओं और जुझारू पत्नियों का चयन किया, जिनके पति शारीरिक रूप से अक्षम हैं और जो खुद दिन-रात मेहनत कर अपने पूरे परिवार की ढाल बनी हुई हैं।

भाई को किडनी देने वाली चंद्रकला, पति की ढाल बनी लक्ष्मी और समाजसेविकाएं बनीं प्रेरणा :- समता विद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि संगठन ने उन महिलाओं को मंच पर सर्वोच्च सम्मान दिया, जिनकी कहानियां समाज के लिए एक बड़ी मिसाल हैं। इन सम्मानित महिलाओं में एक नाम चंद्रकला का भी था, जिन्होंने अपने सगे भाई की जान बचाने के लिए अपनी किडनी दान कर दी। एक महिला के इस बड़े त्याग और साहस को मंच से नमन किया गया। इसी मंच पर संघर्ष की एक और प्रतिमूर्ति लक्ष्मी का भी सम्मान किया गया। एक भीषण दुर्घटना के बाद लक्ष्मी के पति के शरीर में रॉड डालनी पड़ी थी, जिससे वे शारीरिक रूप से अक्षम हो गए। ऐसे कठिन समय में लक्ष्मी ने हार नहीं मानी और अपने बच्चों, बूढ़े मां-बाप और बीमार पति की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। आज वह घर-घर जाकर झाड़ू-पोछा लगाने और कपड़ों पर प्रेस (इस्त्री) करने का काम कर रही हैं ताकि उनका परिवार सम्मान से जी सके।

इसके साथ ही, उन मातृशक्तियों का विशेष रूप से बहुमान किया गया जो बिना किसी प्रसिद्धि की चाह के, अपना कीमती समय निकालकर हर शनिवार और रविवार को कचरा बीनने वाले गरीब बच्चों को निशुल्क ट्यूशन पढ़ाती हैं। संघर्ष की दास्तां सुन मंच पर भावुक हुए अतिथि :- कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि ज्योति जी मूंदड़ा और अजय तिवारी ने भी अपने विचार रखे। मंच से इन संघर्षशील महिलाओं की दास्तां और उनके जज्बे पर बोलते हुए अतिथि अजय तिवारी भावुक हो गए। उनका गला रुंध गया और उन्होंने कहा कि समाज को असल में ऐसी ही मातृशक्तियों पर गर्व होना चाहिए, जो हर मुश्किल को हराकर अपने परिवार को संभालती हैं।

ज्योति जी मूंदड़ा ने भी महिलाओं के इस अदम्य साहस को नमन किया। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन की नीमच जिला अध्यक्ष पिंकी ठाकुर ने अपनी बेबाक राय रखते हुए कहा, "अक्सर बड़े आयोजनों में सिर्फ हाई-प्रोफाइल लोगों को बुलाकर सम्मान की औपचारिकता पूरी कर ली जाती है। लेकिन हमने इस सोच से अलग हटकर उन महिलाओं को तलाशा, जो वास्तव में जमीनी हालातों और मुसीबतों से लड़ीं, या जो बिना किसी स्वार्थ के समाज को बेहतर बना रही हैं। असली सम्मान की हकदार यही महिलाएं हैं।" संचालन रेणु गोस्वामी ने किया, वही आभार गोपाल गहलोत ने माना। मंच पर इन सभी संघर्षशील और समाज हित में काम करने वाली महिलाओं का बेहद आत्मीय अंदाज में बहुमान किया गया। अतिथियों और संगठन के पदाधिकारियों ने उनका तिलक कर पुष्पवर्षा की, दुपट्टा ओढ़ाकर और विशेष उपहार भेंट कर सम्मानित किया। इस गरिमामयी आयोजन में संगठन के पदाधिकारियों और समाजसेवकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। इनमें प्रमुख रूप से जिला अध्यक्ष पिंकी ठाकुर, जुबेदा बोहरा, रेणु गोस्वामी, जीनत दी, तसनीम, पार्वती मोदी, रितिका मग, राधा शुक्ला, कशिश, विनीता चांगल, जय सोनी, धर्मपाल ग्रोवर, मानक मोदी, आकाश शर्मा, गोपाल गेहलोद, राजमल धनोतिया, सुरेश मालवीय, रवि पुरोहित, सुरेश सोनी, पल्लव मग, कैलाश शर्मा, गोविंद प्रसाद शर्मा, दशरथ सेन, अरुण शर्मा, पवन सेन, नरेंद्र पांचाल, सचिन राठौर सहित अन्य समाज सेवक एकत्रित हुए। कार्यक्रम का सफल और मार्मिक संचालन रेणु गोस्वामी ने किया,

जबकि अंत में सभी अतिथियों और उपस्थितजनों का आभार संगठन के महामंत्री गोपाल गहलोत द्वारा व्यक्त किया गया। अंत में उपस्थित सभी लोगों के लिए स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई।

उक्त आशय की जानकारी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन के जिला उपाध्यक्ष आकाश शर्मा ने दी।

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