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महिला दिवस पर विशेष - प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लासूर में पदस्थ श्रीमति ममता राजावत (ए.एन.एम.) की सेवा समर्पण एक मिशाल बनीं*

अनिल लक्षकार March 8, 2026, 5:57 pm Technology

सरवानिया महाराज। मध्यप्रदेश के नीमच जिले की जावद तहसील के डिकेन ब्लॉक में स्थित एक गाँव लासुर जहा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में विगत कई वर्षों से पदस्थ सहायक नर्स (एएनएम) ममता राजावत लगभग 20 वर्षों से अधिक समय से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लासुर में समर्पित भाव से गर्भवती महिलाओ की सेवा सहायता कर रही हैं और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित कर रही हैं। उनके प्रयासों से यह छोटा ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के सबसे भरोसेमंद प्रसव केंद्रों में से एक बन गया है। प्रति महीने इस केंद्र में कम से कम 50 से 60 प्रसव दर्ज किए जाते हैं, और कभी-कभी यह संख्या 90 से लेकर 100 तक भी पहुंच जाती है। इस उपलब्धि की खास बात यह है कि यहाँ मरीजो तथा उनके परिजनों का यहाँ पदस्थ श्रीमती राजावत के प्रति अटूट विश्वास जिसके कारण इनमें से अधिकांश प्रसव सामान्य होते हैं और सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती है, एक ऐसा रिकॉर्ड जिसे बनाए रखना बड़े से बड़े अस्पतालों के लिए भी मुश्किल होता है।

श्रीमति ममता राजावत ने 1991 में स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रवेश किया और 2006 से लासुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सेवा दे रही हैं। सेवानिवृत्ति से पहले केवल दो वर्ष शेष रहते हुए भी मातृ स्वास्थ्य देखभाल के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सहकर्मियों और रोगियों दोनों को प्रेरित करती रहती है। यह केंद्र न केवल आसपास के गांवों से बल्कि पड़ोसी जिलों और राज्यों से भी गर्भवती महिलाओं को आकर्षित करता है।

महिलाएं रतलाम, मंदसौर, नीमच, रामपुरा, कुकडेश्वर्, मनासा, सिंगोलि, रतनगढ़, डिकेन, शाजापुर, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, निम्बाहेड़ा और मध्यप्रदेश तथा राजस्थान के कई गांवों से यहां प्रसव कराने के लिए आती हैं। बड़े-बड़े अस्पतालों और निजी नर्सिंग होम के बजाय गांव की सुविधा को चुनना- सरवानिया महाराज और आस पास के क्षेत्र के लोगों से मिली जानकारी के अनुसार कई परिवार के सदस्यों ने इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव कराया और यहां आकर जो सुविधा और देखभाल गर्भवती महिलाओं की हुई है उससे सभी ने संतुष्टि व्यक्त की। इस सुविधा केंद्र पर लोगों का भरोसा तो है ही साथ ही साथ यहाँ कार्यरत कर्मचारियों में भी झलकता है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में काम करने वाली नर्स ने भी अपने बच्चों को यहीं जन्म देने का विकल्प चुना। श्रीमती ममता राजावत कहती हैं कि उनकी प्रेरणा उनके परिवार से आती है।

उनकी दादी और मां दोनों नर्स थीं, और उनके पति भी हाल ही में सेवानिवृत्त होने से पहले उसी केंद्र में कंपाउंडर के रूप में कार्यरत थे। वह प्रत्येक मामले का सावधानी पूर्वक मूल्यांकन करती है और जटिल गर्भधारण के मामलों को समय रहते जिला अस्पताल भेज देती है।

इस वर्ष जनवरी और फरवरी 2026 में भी केंद्र में क्रमशः 58 और 57 प्रसव दर्ज किए गए, जो सभी सामान्य थे।

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