सिंगोली। यहां पर 1008 आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर सिंगोली में अष्टान्हिका पर्व के उपलक्ष पर मुंबई से पधारे श्री निखिल जी शास्त्री द्वारा प्रातः एवं रात्रि दोनों समय स्वाध्याय सभा का आयोजन किया जा रहा है।
प्रातः काल समयसार के मोक्ष अधिकार पर चर्चा करते हुए आदरणीय निखिल जी ने बताया कि मोक्ष न तो मात्र बंध की जानकारी करने से होता है और न हीं विचार करने से होता है। बल्कि मोक्ष तो आत्मा एवं बंध के द्विधा करण से होता है। और यह कार्य आत्मा स्वयं करती है। एवं इसे करने का साधन प्रज्ञा छेनी (बुद्धि)है। इस बुद्धि को आज तक के हमने पर द्रव्यों, परलक्ष में लगा कर रखा है। इसको अपने स्वलक्ष्य में लगाना हे । लेकिन आत्मा और बंध मेंअत्यंत निकटता होने के कारण इसे कैसे पहचाने इसके जवाब में आपने बताया कि इनके निश्चित लक्षणों के द्वारा इन्हें पहचान कर प्रज्ञा छेनी उनकी अंतसंधि पर पटकने से यह कार्य हो सकता है। निश्चित स्व लक्षणों में जीव का लक्षण चैतन्यता एवं बंध का लक्षण रागादि बताया। अतः इन लक्षणों को पहचान कर इन पर प्रज्ञा छेनी का सावधानी पूर्वक प्रयोग करके मोक्ष को प्राप्त किया जा सकता है।
यह जानकारी देते हुए नवीन जैन ने बताया कि इसी क्रम में रात्रि के समय जैन पांडव पुराण का आयोजन भी रात्रि 8:00 बजे से 9:30 बजे तक चल रहा है।