होलिका दहन सायं 6:38से रात्रि 8:52 बजे तक शुभमुहूर्त, धुलेंडी रंगों की होली 4 मार्च को

भगत माँगरिया March 1, 2026, 4:51 pm Technology

चंद्र ग्रहण 3 मार्च को एक अंगुल से कम दृश्यमान होने से नीमच व आसपास क्षेत्रों में ग्रहण का प्रभाव नहीं रहेगा

चीताखेड़ा। स्थानीय गांव में अलग- अलग 7 से 8 स्थानों पर आज दिवस 2 मार्च 2026 सोमवार को शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया जाएगा। होली का त्योहार उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित शिवशंकर शर्मा ने बताया कि श्रीधर पंचांग अनुसार होलिका दहन आज 2 मार्च सोमवार को सायं 6:38 से रात्रि 8:52 बजे तक शुभ व देर रात्रि 1:30 बजे बाद से शुभ है,बीच के समय में भद्रा काल होने से होलिका दहन शुभ नहीं है। चंद्र ग्रहण 3 मार्च को एक अंगुल से कम दृश्यमान होने से नीमच व आसपास क्षेत्रों में चंद्र ग्रहण का प्रभाव नहीं रहेगा।

होली के त्योहार का उल्लास होली के दहन के साथ प्रारंभ होता है। इस दौरान महिलाएं विधि-विधान से पूजा अर्चना करती है। होली का दहन के पूर्व पुलिस थाना जीरन के निर्देश पर पुलिस सहायता केंद्र चीताखेड़ा चौकी प्रभारी ने सारी जानकारी ली गई। वहीं होलीका का दहन के आयोजकों से पुलिस सुरक्षा दृष्टि से सीधे संपर्क बनाए हुए हैं। चीताखेड़ा में बड़ी होली चौक, माली मौहल्ले में, बजरंग मंदिर के पास भटवाड़ा मौहल्ले में,नीम चौक, इंदिरा आवास कालोनी,राजीव कॉलोनी, रेगर मौहल्ला सहित आदि मौहल्लों में होलिका दहन किया जाएगा। रंगों की दुनिया अद्भुत और रहस्यमय है। होली का रंग हमारे व्यक्तित्व और मनोदशा को भी प्रभावित करता है। व्यक्तित्व व रंगों को जानने का अच्छा मौका और त्योहार होली ही है। होली दहन से रंगों के त्योहार की शुरुआत होती है जो निरंतर रंग तेरस तक चलेगी। भारतीय संस्कृति का अनुपम और पावन पर्व होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि मन के मेल को धोकर रिश्तों में मिठास घोलने का सुअवसर भी है। इनका कहना :- आज की बिजी लाइफ में लोग एक ही घर में रहते हुए भी भावनात्मक दूरी का अनुभव करते हैं।

मोबाइल और सोशल मीडिया से आत्मीयता कहीं पीछे छुटती दिखती है। ऐसे समय में होली हमें गिले -शिकवे भुलाकर गले मिलने का मौका देती है। ---श्रीमती मंजू जैन, सरपंच चीताखेड़ा। अटूट विश्वास का उत्सव होली में होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का, धैर्य व भक्त का भगवान पर अटूट विश्वास की कहानी बताता है । यह संदेश देता है कि विषम परिस्थिति को श्रद्धा से अनुकूल बनाया जा सकता है। ---श्रीमती सुमित्रा मांगरिया, जीरन ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष। प्राकृतिक गुलाल से खेलें होली क्योंकि होली एकता, प्रेम व उल्लास के रंगों से जीवन में सकारात्मकता भर देता है।

होलिका दहन के बाद एक दूसरे को गुलाल लगा गले मिलने की परंपरा बहुत अच्छी लगती हैं। मुझे प्राकृतिक रंग से होली खेलना पसंद है।

---श्रीमती सुनीता लबाना, जनपद पंचायत सदस्य।

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