आज 'आयुष्मान' योग रहेगा, जो दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ है। अपने महत्वपूर्ण कार्यों के सफल संचालन के लिए अभिजीत मुहूर्त का लाभ उठाएं, क्योंकि इस दौरान किए गए कार्य शुभ फल प्रदान करते हैं। राहुकाल के दौरान किसी भी तरह के मानसिक तनाव या महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचें और अपनी सहजता बनाए रखें।
महत्वपूर्ण विवरण तिथि:-
शुक्ल एकादशी – रात्रि 10:32 बजे तक योग:
आयुष्मान – सायं 07:44 बजे तक करण: वणिज – प्रातः 11:31 बजे तक करण: विष्टि – रात्रि 10:32 बजे तक सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
सूर्योदय का समय: प्रातः 06:48 बजे
सूर्यास्त का समय: सायं 06:20 बजे चंद्रोदय का समय: दोपहर 02:01 बजे
चंद्रास्त का समय: रात्रि 04:38 बजे (28 फरवरी) समस्त नव ग्रहों की की राशियां (प्रात: 06: 00 बजे) सूर्य देव: कुंभ राशि में स्थित हैं। चन्द्र देव: मिथुन राशि में स्थित हैं। मंगल देव: कुंभ राशि में स्थित हैं।
बुध देव: कुंभ राशि में स्थित हैं। गुरु बृहस्पति: मिथुन राशि में स्थित हैं। शुक्र देव: कुंभ राशि में स्थित हैं। शनि देव: मीन राशि में स्थित हैं। राहु: कुंभ राशि में स्थित हैं। केतु: सिंह राशि में स्थित हैं।
आज के शुभ मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त:-
दोपहर 12:11 बजे से दोपहर 12:57 बजे तक अमृत काल:
आज नहीं आज के अशुभ समय
राहुकाल: प्रातः 11:08 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक
गुलिकाल: प्रातः 08:15 बजे से प्रातः 09:41 बजे तक
यमगण्ड: दोपहर 03:27 बजे से सायं 04:53 बजे तक
आज का नक्षत्र आज चंद्रदेव आर्द्रा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
आर्द्रा नक्षत्र: प्रातः 10:48 बजे तक नक्षत्र स्वामी: राहु राशि स्वामी: बुधदेव देवता: रुद्र (भगवान शिव का संहारक रूप) प्रतीक: आंसू की बूंद सामान्य विशेषताएं: अत्यंत बुद्धिमान, चतुर, भौतिकवादी, परिवर्तनशील, जिज्ञासु, आत्म-केंद्रित, कभी-कभी अविश्वसनीय और क्रोधित होने वाले। यह नक्षत्र विनाश के माध्यम से पुनरुद्धार और अहंकार के त्याग का प्रतीक है।
आज आमलकी एकादशी है आमलकी एकादशी 2026 एकादशी तिथि प्रारंभ: 26 फरवरी, 2026 को रात 12:33 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 27 फरवरी, 2026 को रात 10:32 बजे पारण का समय (28 फरवरी): सुबह 06:47 से 09:06 तक फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को आमलकी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। यह पावन तिथि महाशिवरात्रि और होली के मध्य पड़ती है। व्रत खोलने की प्रक्रिया को पारण कहा जाता है, जिसे एकादशी के अगले दिन सूर्योदय के पश्चात करना आवश्यक है। धार्मिक नियमों के अनुसार, द्वादशी तिथि के समाप्त होने से पहले व्रत खोल लेना चाहिए। पारण के समय इस बात का ध्यान रखें कि हरि वासर का समय बीत चुका हो, जिसके लिए सुबह का समय सर्वश्रेष्ठ रहता है। पारिवारिक जीवन जीने वाले लोगों को पहले दिन उपवास रखना चाहिए, वहीं सन्यासियों और मोक्ष के अभिलाषियों के लिए अगले दिन का व्रत अधिक फलदायी माना गया है। यदि किसी कारणवश सुबह पारण संभव न हो, तो इसे दोपहर के बाद पूर्ण करें। श्री हरि विष्णु को समर्पित यह व्रत भक्तगण अत्यंत सहजता के साथ संपन्न करते हैं।