नर्सिंग फर्जीवाड़ा मान्यता मामला: हाई कोर्ट ने अपात्र कॉलेजों के छात्रों को एक महीने में सूटेबल कॉलेजों में ट्रांसफर करने के निर्देश दिए

Neemuch headlines April 1, 2025, 6:45 pm Technology

नर्सिंग फर्जीवाड़े मान्यता मामले में आज जबलपुर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई, कोर्ट ने इस मामले में तीन प्रमुख निर्देश दिए, कोर्ट ने आदेश दिया कि अपात्र कॉलेजों के छात्रों को सूटेबल कॉलेजों में 30 दिनों में ट्रांसफर किया जाये, मान्यता और संबद्धता की ओरिजनल फ़ाइलें हाई कोर्ट में पेश होने के बाद हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को फाइलों का अवलोकन कर, रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए और सीबीआई जांच में जिन कॉलेजों में प्रवेशित छात्र नहीं मिले उनको परीक्षा में बैठने के लिए अपात्र घोषित कर दिया नर्सिंग फ़र्ज़ीवाडे मामले में लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की जनहित याचिका पर हाई कोर्ट की स्पेशल बेंच के जस्टिस संजय द्विवेदी और जस्टिस अचल कुमार पालीवाल ने मामले की सुनवाई कर महत्वपूर्ण आदेश दिए हैं।

हाई कोर्ट के पूर्व आदेश के पालन में आज अपात्र संस्थाओं की मान्यता और संबद्धता की ओरिजनल फ़ाइलें सरकार की ओर से पेश की गई, जिस पर हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को आदेश दिए हैं कि सभी फाइलों का अवलोकन कर अपनी रिपोर्ट सौंपे, जिसमें तुलनात्मक रूप से यह बताना होगा कि जो कॉलेज सीबीआई जांच में अपात्र पाए गए उन्हें आखिर किन परिस्थितियों में और किन- किन कमियों के होते हुए भी निरीक्षणकर्ता अधिकारियों द्वारा अनुमतियां दी गई, हाईकोर्ट के निर्देश पर अब पीआईएल के याचिकाकर्ता को हजारों दस्तावेजों सहित फाइलों का महाधिवक्ता कार्यालय में अवलोकन कर अपात्र कॉलेजों को मान्यता देने वाले जिम्मेदारों के नामो सहित तथ्यात्मक रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश करनी होगी, उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट ने पूर्व में भी संपूर्ण प्रदेश के कॉलेजों की मान्यता की फाइलें तलब कर याचिकाकर्ता को अवलोकन करने के निर्देश दिए थे जिसके बाद याचिकाकर्ता द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में प्रदेश में कागजों में चल रहे कॉलेजों और फैकल्टी फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था। सावधान, साइबर ठगों ने निकाला ठगी का नया तरीका, अब ऐसे बना रहे निशाना, पल भर में कर देते हैं एकाउंट साफ़ हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए हैं कि सीबीआई जांच में जिन कॉलेजों में कोई छात्र प्रवेशित होना नहीं पाए गए हैं, उन कॉलेजों के छात्रों को एनरोलमेंट और परीक्षा में बैठने की पात्रता नहीं होगी । दरअसल याचिकाकर्ता ने आवेदन पेश कर हाई कोर्ट को बताया कि कई कॉलेजों द्वारा सीबीआई जांच के समय सीबीआई को बताया गया था कि उनके कॉलेजों में कोई भी छात्र प्रवेशित नहीं, और कई कॉलेजों ने सीबीआई को एडमिशन के रिकॉर्ड दिखाने से इंकार कर दिया था । इसी आधार पर सीबीआई ने भी हाई कोर्ट में सौंपी। याचिकाकर्ता के तर्कों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने दिया आदेश सीबीआई रिपोर्ट में इन कॉलेजों में छात्रों का एडमिशन नहीं होना बताया है, लेकिन बाद में जब हाई कोर्ट ने छात्रहित में सभी श्रेणी पात्र, अपात्र और डिफिशिएंट कॉलेजो के छात्रों को नामांकन कर परीक्षा में बैठाने के निर्देश दिए। वे सभी कॉलेज छात्रों के बैक डेट पर एडमिशन दर्शा कर एनरोलमेंट और परीक्षा में बैठाने के आवेदन कर रहे हैं साथ ही वे कॉलेज भी छात्रों का एनरोलमेंट कराना चाहते हैं जो सीबीआई जाँच में अस्तित्व में होना नहीं पाये गये हैं। 30 दिन में अपात्र कॉलेजों के छात्रों को सूटेबल कॉलेजों में ट्रांसफर करने के निर्देश याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट के समक्ष एक अन्य आवेदन पेश कर बताया कि नर्सिंग काउन्सिल द्वारा अपात्र बताये गए कॉलेजों के छात्रों को सूटेबल कॉलेजों में ट्रांसफर नहीं किया जा रहा है जिससे हजारों छात्रों के भविष्य का संकट उत्पन हो गया है , और अनसुटेबल कॉलेजों के पास उन्हें पढ़ाने और प्रशिक्षण देने हेतु आवश्यक संसाधन मौजूद नहीं है, हाई कोर्ट ने इस मामले में आदेश दिए है कि सीबीआई जांच में अपात्र पाए गए कॉलेजों में नामांकित छात्रों को 1 माह के भीतर सूटेबल कॉलेजों में ट्रांसफर किया जाए।

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